जब सुरैया की आवाज सुनकर भावुक हो गए थे पंडित जवाहर लाल नेहरू



1954 में प्रदर्शित हई फिल्म 'मिर्जा गालिब' में सुरैया ने नवाब जान का किरदार निभाया था जो शायर मिर्जा गालिब से बेहद प्यार करती है. इस फिल्म में मिर्ज़ा गालिब की पांच गजलों को सुरैया ने अपनी आवाज दीथी.

जिस वक़्त सुरैया ने यह ग़ज़ल गाया था उस वक़्त उनकी आवाज में ही नहीं बल्कि उनकी आंखों में भी कुछ अलग था जो भी उनकी आँखों को देखता उसमें कैद हो जाता.

 इसलिए जिस किसी ने भी सुरैया की आवाज सुनी वो उनका कायल हो गया. जिस वक़्त ये फिल्म आयी थी, उस वक्त भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू थे. उन्होंने भी इस फिल्म में सुरैया की गाईं यह गजलें सुनी थीं. इन्हें सुनने के बाद वह भी सुरैया की आवाज और अदायगी के दीवाने हो चुके थे.

पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस बात का खुलासा एक समारोह में भी किया था. जब सुरैया उनसे मुलाकात हुई तो नेहरु ने सुरैया से कहा था तुमने गालिब की रुह को जिंदा कर दिया.

सुरैय्या की लोकप्रियता का आलम यह था कि उनकी एक झलक पाने के लिए उनके चाहने वाले मुंबई में उनके घर के सामने घंटों खड़े रहते थे और उनके एक दीदार का इंतज़ार करते. सुरैया ने 31 जनवरी 2004 को दुनिया से अलविदा कह दिया.

सुरैया ने 40 से 50 के दशक तक हिंदी सिनेमा पर राज किया. उन्हें उनकी प्रतिभा के लिए मलिका-ए-तरन्नुम के खिताब से भी नवाजा गया.


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