1962 की एक फ़िल्म 20 साल बाद के एक गाने को रेकोर्ड करने के लिये लता को आना था,मगर वो हो गयीं बीमार ! फ़िल्म के म्यूजिक डाइरेक्टर हेमंत कुमार गीत रेकोर्ड करने के लिये तैयार थे ! सभी रेडी थे,पर लता रिकोर्डिंग पर नही आयीं !
लता जी सुबाह सो कर उठीँ तो उन्हे लगा की तबियत ठीक नही है ! पेट गड़बड़ था , धीरे धीरे हालत बिगड़ने लगी , अचानक वोमिट होने लगा ,ग्रीन ग्रीन स्टफ निकलने लगा ! डाक्टर बुलाया गया ,बहुत कमज़ोरी आ गयी थी ! जांच मे जो पता चला उस से डाक्टर परेशान हो गये,जब पूछा तो पता चला की इन्हे स्लौ पोइजन दिया जा रहा है !
ओर ये निर्णय लिया गया की उषा जी ही दीदी के लिये खाना बनायेन्गी ओर कोई रसोई मे नही जायेगा ! पहले बनाता था कूक ! वो दिखाइ नही दिया,बहुत ढूँढा पर नही मिला,ना ही वो अपनी पगार लेने आया, जिससे यही माना गया की ज़रूर किसी ने लता के खिलाफ़ साज़िश रची होगी ओर इस कूक को लगाया होगा !
इस ट्रैजिडी के बाद लता जी को वापस रिकवर होने मे पूरे तीन महीने लग गये ! घर पर ही इलाज होता रहा ! इस दौरान उनके एक दोस्त ने उनका बहुत साथ दिया ओर वो थे शायर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी साब ! मजरूह साब शाम 6 बजे अपने घर से आ जाते लता जी को घंटों तक कवितायें सुनाते शायरी सुनाते गप्पें मारते , इस तरा ये सिलसिला लगातार 3 महीने तक चला ,जब तक लता जी ठीक नही हो गयीं !
ओर उसके बाद उन्होने पहला गीत जो गाया वो था हेमंत कुमार की फ़िल्म 20 साल बाद का " कहीं दीप जले कहीं दिल ..

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