''परिचय'- (1972 )
20 अक्टूबर 1972 को रिलीज़ हुई गुलज़ार की फिल्म 'परिचय 'एक नौजवान शिक्षक रवि ( जीतेन्द्र ) की कहानी है जो बच्चो को अपने गाँव से विशेष रूप से पढ़ाने आते है ....राय साहेब ( प्राण ) इन बच्चो के दादा है ,ये बच्चे अपनी शरारतो से किसी भी शिक्षक को अपने घर पर टिकने नहीं देते लेकिन रवि इन बच्चो को न केवल सुधारता है बल्कि उन्हें शिक्षित भी करता है .......इस फिल्म में मुख्य भूमिका जीतेन्द्र ,जया भादुड़ी , प्राण ,ऐ.के हंगल, असरानी ,गीता सिद्धार्थ ,और लीला मिश्रा ने निभाई थी विनोद खन्ना और संजीव कुमार गेस्ट रोल में थे , इसी वर्ष ही आई गुलज़ार की एक अन्य फिल्म 'कोशिश 'में संजीव कुमार जया भादुड़ी के पति बने थे जबकि 'परिचय 'में वो जया भादुड़ी के पिता बने थे .......गुलज़ार साहेब बंगाली उपन्यासो पर फिल्मे बनाने के लिए मशहूर है यह फिल्म भी बंगाली उपन्यास,, Rangeen Uttarain पर आधारित थी जिसे आर.के मित्रा ने लिखा था लेकिन कुछ फ़िल्मी आलोचक इसे आंशिक रूप से 1965 की हॉलीवुड फिल्म 'द साउंड ऑफ म्यूजिक ' से प्रेरित भी बताते है
'परिचय 'को गुलज़ार ने निर्माता वी.के सोबती के लिए निर्देशित किया था और संगीत आर.डी बर्मन का था इस फिल्म का एक गाना 'मुसाफिर हूँ यारो ' बिनाका गीतमाला में उस वर्ष खूब बजा था लेकिन इस मशहूर गाने की धुन आर.डी ने नहीं गिटारवादक भानु गुप्ता ने बनाई थी..... 'बीती न बिताये रैना' गाने के लिए लता मंगेशकर जी को नेशनल अवार्ड भी मिला था
गुलज़ार साहेब की फिल्मो में 'जंपिंग जैक' कहे जाने वाले जीतेन्द्र की एक अलग ही छवि नज़र आती है 'परिचय' में भी कुछ ऐसा ही है 'परिचय 'एक शिक्षक और विधार्थी के बीच के नाजुक रिश्ते को बखूबी दर्शाती है और निसंदेह गुलज़ार की एक उत्तम कृति है।
20 अक्टूबर 1972 को रिलीज़ हुई गुलज़ार की फिल्म 'परिचय 'एक नौजवान शिक्षक रवि ( जीतेन्द्र ) की कहानी है जो बच्चो को अपने गाँव से विशेष रूप से पढ़ाने आते है ....राय साहेब ( प्राण ) इन बच्चो के दादा है ,ये बच्चे अपनी शरारतो से किसी भी शिक्षक को अपने घर पर टिकने नहीं देते लेकिन रवि इन बच्चो को न केवल सुधारता है बल्कि उन्हें शिक्षित भी करता है .......इस फिल्म में मुख्य भूमिका जीतेन्द्र ,जया भादुड़ी , प्राण ,ऐ.के हंगल, असरानी ,गीता सिद्धार्थ ,और लीला मिश्रा ने निभाई थी विनोद खन्ना और संजीव कुमार गेस्ट रोल में थे , इसी वर्ष ही आई गुलज़ार की एक अन्य फिल्म 'कोशिश 'में संजीव कुमार जया भादुड़ी के पति बने थे जबकि 'परिचय 'में वो जया भादुड़ी के पिता बने थे .......गुलज़ार साहेब बंगाली उपन्यासो पर फिल्मे बनाने के लिए मशहूर है यह फिल्म भी बंगाली उपन्यास,, Rangeen Uttarain पर आधारित थी जिसे आर.के मित्रा ने लिखा था लेकिन कुछ फ़िल्मी आलोचक इसे आंशिक रूप से 1965 की हॉलीवुड फिल्म 'द साउंड ऑफ म्यूजिक ' से प्रेरित भी बताते है
'परिचय 'को गुलज़ार ने निर्माता वी.के सोबती के लिए निर्देशित किया था और संगीत आर.डी बर्मन का था इस फिल्म का एक गाना 'मुसाफिर हूँ यारो ' बिनाका गीतमाला में उस वर्ष खूब बजा था लेकिन इस मशहूर गाने की धुन आर.डी ने नहीं गिटारवादक भानु गुप्ता ने बनाई थी..... 'बीती न बिताये रैना' गाने के लिए लता मंगेशकर जी को नेशनल अवार्ड भी मिला था
गुलज़ार साहेब की फिल्मो में 'जंपिंग जैक' कहे जाने वाले जीतेन्द्र की एक अलग ही छवि नज़र आती है 'परिचय' में भी कुछ ऐसा ही है 'परिचय 'एक शिक्षक और विधार्थी के बीच के नाजुक रिश्ते को बखूबी दर्शाती है और निसंदेह गुलज़ार की एक उत्तम कृति है।

Comments
Post a Comment